विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

(विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उ.प्र. शासन)

वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान परिषद की प्रमुख उपलब्धियाँ

(माह जनवरी - 2018 तक)

  • विज्ञान प्रौद्योगिकी के प्रमुख चयनित क्षेत्रों में लगभग 160 वैज्ञानिक शोध प्रायोजनाओं को वित्तपोषित किया गया, जिस पर रू. 300.00 लाख की धनराशि व्यय की गयी।
  • विज्ञान लोकप्रियकरण कार्यक्रमों के अन्तर्गत 20 सेमिनार / सिम्पोजिया / कान्फ्रेंस, "हैलो यंग साइंटिस्ट फोन इन क्विज" के 45 रेडियो कार्यक्रम एवं प्रदेश के 75 जनपदों में कुल 350 विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिस पर कुल धनराशि रू. 400.00 लाख व्यय किया गया है।
  • परिषद द्वारा संचालित 03 नक्षत्रशालाओं के माध्यम से लगभग दो लाख दर्शकों एवं दो सचल नक्षत्रशालाओं के माध्यम से प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग डेढ़ लाख दर्शाकों द्वारा खगोल विज्ञान आधारित फिल्म शो का अवलोकन किया गया। जनपद गाजियाबाद में मिनी सांइस पार्क का संचालन प्रारम्भ हो गया है। इस पर कुली रू. 360.00 लाख की धनराशि का व्यय हुआ।
  • परिषद द्वारा शोध परियोजनाओं में प्राप्त होने वाले प्रस्ताव को 01 सित्मबर, 2017 से ऑनलाइन कर दिया गया। इसी के साथ ई-टेण्डरिंग, ई-फाइल एवं जेम प्रणाली व्यवस्था को भी परिषद में लागू कर दिया गया है।
  • जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में टिश्यू कल्चर तकनीक द्वारा लगभग 25 लाख केले के पौधों तथा जैव उर्वरक का उत्पादन कर किसानों को उपलब्ध कराये गये एवं उक्त क्षेत्र में लगभग 4000 कृषकों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
  • नव प्रवर्तन के क्षेत्र में बाल विज्ञान माडल, ड्रामा परियोजना, विज्ञान मॉडलों में पुरस्कार प्राप्त छात्र / छात्राओं तथा अभिनव कार्य करने वाले प्रदेश के 05 नव प्रवर्तकों को नव प्रवर्तन सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रदेश के सभी जनपदों में नव प्रवर्तन प्रदर्शनी का आयोजन तथा स्काउटिंग कार्यक्रम किया गया, जिस पर रू. 165.00 लाख धनराशि का व्यय किया गया।
  • प्रदेश में बौद्धिक सम्पदा संरक्षण हेतु लगभग 91 व्यक्तियों को मार्ग दर्शन प्रदान किया गया। परिषद द्वारा 12 पेटेण्ट, 03 ट्रेडमार्क, 08 कापीराइट एवं 03 डिजाइन संरक्षित कराने में सहायता प्रदान की गयी है। इस मद पर कुल रू. 25.00 लाख का व्यय किया गया।
  • विज्ञान के प्रति छात्र-छात्राओं में अभिरूचि पैदा करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश प्रतिभा छात्रवृत्ति परियोजना के अन्तर्गत कुल 4000 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। इस पर कुल रू. 510.00 लाख का व्यय किया गया।

रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन्स सेन्टर, उत्तर प्रदेश

(विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तर प्रदेश शासन)

वर्तमान सरकार के कार्याकल के दौरान केन्द्र की प्रमुख उपलब्धियाँ

(माह जनवरी, 2018 तक)

  • प्रदेश के गोरखपुर एवं बलिया जनपदों में बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर बाढ़ प्रबंधन हेतु विभिन्न मानचित्रों का सृजन कर बेहतर बाढ़ प्रबंधन हेतु संस्तुति / तकनीकी रिपोर्ट सिंचाई विभाग, उ.प्र. को प्रेषित।
  • प्रदेश के विभिन्न उपयोगकर्ता विभागों यथा- लघु सिंचाई विभाग, आवास विकास परिषद, लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन एवं लखनऊ कैन्टोनमेंट बोर्ड के अनुरोध पर प्रदेश के चयनित जनपदों में भूजल उपलब्धता हेतु ड्रिलिंग के लिए उपयुक्त स्थलों के चिन्हांकन हेतु 192 बिन्दुओं पर भूभौतिकीय सर्वेक्षण उपरान्त ड्रिलिंग हेतु संस्तुति।
  • प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के महोबा जनपद के चरखारी विकास खण्ड में कृत्रिम पुनर्भरण एवं जल संचयन हेतु उपयुक्त स्थलों एवं संरचनाओं का चयन एवं तकनीकी रिपार्ट लघु सिंचाई विभाग, उ0प्र0 को प्रेषित।
  • प्रदेश के सोनभद्र जनपद में दो खनन क्षेत्रों का उपग्रहीय आंकड़ों के माध्यम से चिन्हांकन तथा सजरा स्तर पर डिजिटल डाटाबेस के सृजन का कार्य पूर्ण कर तकनीकी रिपोर्ट भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, उ.प्र. को प्रेषित।
  • लोक निर्माण विभाग द्वारा चिन्हित 7 राज्य मार्गों पर मोबाइल लिडार तकनीक से सड़क चौड़ीकरण हेतु सर्वेक्षण कार्य पूर्ण।
  • प्रदेश के विभिन्न उपयोगकर्ता विभागों हेतु रिमोट सेसिंग एवं जी.आई.एस. तकनीक की उपयोगिता सम्बन्धि विषय पर एक सप्ताह के 09 प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं 07 जनपदों में जनपद के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक दिवसीय जनपद स्तरीय जागरूकता कार्यशालाओं का सफलतापूर्वक आयोजन।