डॉ. दिनेश शर्मा के बारे में

डॉ. दिनेश शर्मा का जन्म लखनऊ के एक कर्मकाण्डी ब्राह्मण परिवार में 12 जनवरी, 1964 को हुआ था। इनके पिता का नाम केदार नाथ शर्मा (पाधाजी) है। इनके पिता भी एक आर.एस.एस व जनसंघ के कार्यकर्ता थें। 

सन् 1988 में डॉ. दिनेश शर्मा ने लखनऊ विश्वविद्यालय में एक अस्थायी अंशकालिक प्रवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत करी, जिसके बाद कॉमर्स विभाग में आप स्थायी प्रवक्ता, रीडर के बाद में प्रोफेसर हो गए। विश्वविद्यालय में आपने अपने प्रोफेसर कार्यकाल के दौरान लगभग 20 से अधिक छात्रों को पीएचडी के लिए दिशा प्रदान करी व 6 पुस्तकों का लेखन तथा लगभग 40 शोध पत्रों को लिखने का कार्य किया जो आपके शैक्षणिक करियर का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

अपने छात्र जीवन के समय से ही डॉ. दिनेश शर्मा राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में खास दिलचस्पी रखते थें। जिस वक्त डॉ. दिनेश शर्मा अपनी पढ़ाई कर रहे थें, उसी वक्त सबसे पहली बार आपने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी (जो आर.एस.एस. की राजनीतिक छात्र विंग है) में कदम रखा और अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करी। इसके बाद वर्ष 1987 में इन्हे लखनऊ विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष के तौर पर चुना गया। इसके बाद इनके साधारण और सरल जीवन और बेहतर राजनीतिक परिणामों के चलते इन्हे सर्वप्रथम 1991 में प्रदेश  भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया तथा  वर्ष 1993 में इन्हें भारतीय युवा जनता मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। यह 1998 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। बाद में भा.ज.पा सरकार बनने पर इन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान कर उत्तर प्रदेश पर्यटन विकास निगम का उपाध्यक्ष बनाया गया। बाद में भारत सरकार में आप राष्ट्रीय युवा मोर्चा आयोग के सदस्य बनें। उसके बाद आपने उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति व भारत सरकार की युवा नीति तैयार करने में मत्वपूर्ण योगदान दिया। आपने पर्यटन उद्योग पर पुस्तक लिखि व पी.एच.डी भी करवाई । पर्यटन निगम के उपाध्यक्ष रहते हुए आपको भा.ज.पा. संगठन में उ0प्र0 भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश प्रभारी भी बनाया गया।

आपके राजनीतिक करियर में उस वक्त बड़ा बदलाव आया जब भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी की नजर आप पर पड़ी और फिर इसके बाद आपको लखनऊ से भाजपा के महापौर प्रत्याशी पद के लिए चुना गया, जिसके बाद आप वर्ष 2006 में प्रथम बार लखनऊ के मेयर चुने गए। वर्ष 2012 में आपके बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए आपको दोबारा भाजपा की ओर से लखनऊ के मेयर पद के प्रत्याशी के रूप में चुना गया और आप दूसरी बार भी भारी मतों से विजयी हुए और लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में आपका नाम दर्ज हुआ। विधान सभा के चुनाव के तत्काल बाद महापौर का चुनाव हुआ, विधान सभा चुनावो में लखनऊ की 7 सीटों में से 6 में पराजय होने के बाद भी महापौर पद रिकार्ड मतों से विजय प्राप्त करना महत्वपूर्ण था।

आपके राजनीतिक परिणामों, स्वच्छ छवि को देखते हुए और 2014 में हुए लोक सभा के आम चुनाव में आप द्वारा दिए गए योगदान को देखते हुए भाजपा को उत्तर प्रदेश में भारी मतों से जीत मिलने के बाद आपको 16 अगस्त, 2014 को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात प्रदेश का प्रभारी भी बनाया गया। देश के सबसे बड़े राजनीतिक सदस्यता अभियान का आपको राष्ट्रीय प्रभारी बनाया गया, जिसमें राष्ट्रीय नेताओं के मार्गदर्शन में भा.ज.पा दुनिया की सबसी बड़ी पार्टी बनी।

प्रत्येक वर्ग, धर्म एवं हर तबके के समाज के बीच आपकी छवि हमेशा से मिलनसार रही है। जिसकी वजह से आम जनता के बीच आप हमेशा से काफी लोकप्रिय नेता रहे हैं। इसी छवि के कारण वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जब भा.ज.पा की भारी मतों से जीत हुई व सरकार बनी तब आपको प्रदेश का उपमुख्यमंत्री चुना गया, जिससे आपका कार्यक्षेत्र बढ़ गया और पूरे प्रदेश को और बेहतर बनाने का मौका मिला।

उपमुख्यमंत्री के पद के साथ-साथ आपको प्रदेश के प्रमुख विभागों जैसे माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी का भी कार्य भार सौंपा गया। साथ में एक अन्य महत्वपूर्ण दायित्व विधान परिषद में "नेता सदन" की जिम्मेदारी मिली जिसका निर्वाहन अभी तक सफलतापूर्वक कर रहे हैं। औद्योगिक नीति निर्माण हेतु मंत्री समूह के भी आप अध्यक्ष रहें।